Nikola Tesla's biography in hindi || निकोला टेस्ला की पूरी कहानी (Part 1)

Nikola Tesla's biography in hindi || निकोला टेस्ला की पूरी कहानी (Part 1)

मैं सोचता था की थामस अल्वा एडिसन वह वैज्ञानिक हैं जिन्होंने दुनिया को रोशनी से भर दिया। आप उस जिंदगी की कल्पना करो जो हम डेढ़ सौ साल पहले जीते थे। सूरज ढलने के साथ चारों तरफ अंधेरे का साम्राज्य होता था और हमारी दुनिया सिमट जाती थी। हम लालटेन की रोशनी में ही अपने चारों तरफ थोड़ी सी रोशनी कर पाते थे। लोग मशाल जलाकर सफर किया करते थे। और दूसरी सुबह का बेसब्री से इंतजार करते थे। लेकिन फिर जन्म लिया ऐसे इंसान ने जिसने दुनिया को रोशनी से भर दिया। वो इंसान था "निकोला टेस्ला (Nikola Tesla)"। यह कहानी है उसी रहस्यमई वैज्ञानिक की जिसने पूरी दुनिया में एक क्रांति ला दी। इंसान और विज्ञान "निकोला टेस्ला" के योगदान को कभी भुला नहीं सकते। लेकिन उस महान वैज्ञानिक के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं।

Nikola Tesla 

SMILJAN नाम का एक गांव जो मध्य और दक्षिण पूर्वी यूरोप के एक देश CROATIA में है। सन 1856, 9 और 10 जुलाई की मध्य रात्रि मे बिजली कड़क रही थी और भयंकर तूफान आया हुआ था। उसी तूफानी रात में एक बच्चे का जन्म हुआ जिसका नाम "निकोला टेस्ला (Nikola Tesla) " रखा गया।

निकोला टेस्ला के पिता MILUTINA TESLA , SMILJAN गांव में ही एक चर्च के पादरी थे। टेस्ला की मां भी एक पादरी की बेटी थी। वह पढ़ी-लिखी नहीं थी लेकिन वह एक असाधारण महिला थी। घर पर खाली वक्त मिलने पर वह तरह-तरह की होम क्राफ्ट टूल बना लेती थी। अगर घर का कोई सामान खराब हो जाता तो वह उस को repair कर देती थी। कुल मिलाकर वह एक innovative महिला थी।
Milutina Tesla (Tesla's father) 

अपनी मां को घर के तरह-तरह के उपकरणों को बनाते देख कर ही "टेस्ला" को इलेक्ट्रिक इंवेंशन करने की प्रेरणा मिली। टेस्ला बचपन से ही कई तरह के experiment करते थे। जिसके कारण वह आसपास के गांव में बहुत चर्चित रहते थे। वह integral calculus के कठिन से कठिन सवालों को बिना किसी गलती के ही अपने माइंड से हल कर लेते थे और उनके टीचर्स को लगता था कि वह cheating कर रहे हैं। टेस्ला कड़ी मेहनत करते थे और इसीलिए उन्होंने 4 साल की पढ़ाई को 3 सालों में ही पूरा कर लिया और 1873 में वह ग्रेजुएट हो गए।

टेस्ला के पिता उनको पादरी बनाना चाहते थे। लेकिन टेस्ला अपनी आगे की पढ़ाई करना चाहते थे। उन्होंने अपने पिता से अपने एक सपने के बारे में बताया। जिसमें उन्होंने देखा था कि वह अमेरिका में niagara falls की गतिज ऊर्जा को इलेक्ट्रिसिटी मे बदल रहे हैं।

Niagara falls

बहुत अनुरोध की उसने अपने पिता से लेकिन उनके पिता नहीं माने। ग्रेजुएट होने के बाद जब टेस्ला 1873 में अपने गांव वापस आए तो उनको हैजा हो गया। इस बीमारी ने टेस्ला को लगभग 9 महीने तक बिस्तर से उठने नहीं दिया। और वह कई बार मरते-मरते बचे। उनकी मां उनकी इस बीमारी को देखकर बहुत दुखी थी। उनके पिता ने उनसे कहा की अगर तुम अपनी बीमारी से बाहर निकल आते हो तो मैं तुम्हारा एडमिशन सबसे अच्छे इंजीनियरिंग स्कूल में करवा दूंगा और ऐसा हुआ भी। टेस्ला के अंदर ना जाने ऐसी कौन सी शक्ति आ गई जिसने उनको इस खतरनाक बीमारी से बाहर निकाल लिया।

सन 1875 में अपने वादे के मुताबिक टेस्ला के पिता ने उनका ऐडमिशन GRAZ (जो कि austria में है) के एक कॉलेज "ऑस्ट्रियन पॉलिटेक्निक" में करवा दिया। अपने पहले साल में टेस्ला ने एक भी लेक्चर मिस नहीं किया। उन्होंने लगभग 9 एग्जाम पास किए। जब की जरूरत थी सिर्फ चार एग्जाम पास करने की। और सभी एग्जाम में उन्होंने हाईएस्ट ग्रेड भी हासिल किए। टेस्ला ने यहां पढ़ाई करते हुए इलेक्ट्रिसिटी के बारे में माइकल फैराडे के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंडक्शन सिद्धांत का बहुत ही गहराई में अध्ययन किया। और फिर उन्होंने उनके सिद्धांतों में कुछ सुधार भी किए। जब उन्होंने अपने प्रोफेसर से अल्टरनेटिंग करंट के कांसेप्ट की बात की तो वह हंसने लगे। और उन्होंने टेस्ला का मजाक उड़ाया।
समय गुजरता रहा। 17 अप्रैल 1879 को टेस्ला के पिता का देहांत हो गया। 1882 मे टेस्ला हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट चले गए। वहां उन्होंने Theodore Puska's की टेलीग्राफ कंपनी जोकि बुडापेस्ट का टेलीफोन एक्सचेंज था, मे काम किया। Theodore Puska's टेलीफोन के आविष्कारक थे। टेस्ला ने सेंट्रल स्टेशन के कई उपकरणों में सुधार किया और उन्होंने टेलीफोन रिपीटर या एंपलीफायर को ठीक तरीके से काम करने लायक बनाया। Theodore Puska's के अंदर उनकी टेलीफोन एक्सचेंज में काम करते हुए टेस्ला ने कुछ ही महीनों में अपने टैलेंट की छाप छोड़ दी। और उसी साल (1882) मे Theodore Puska's ने टेस्ला को पेरिस में Continental Edison Company, Paris मे एक दूसरी नौकरी दिलवा दी। Continental Edison Company मे टेस्ला को शहर में लाइटिंग सिस्टम को इंस्टॉल करने का काम दिया गया। कंपनी के मैनेजमेंट को पता चला की टेस्ला को इंजीनियरिंग और फिजिक्स का बहुत अच्छा नॉलेज है तो उन्होंने टेस्ला को कहा कि वह इलेक्ट्रिक पैदा करने वाले डायनामोस और मोटर्स की डिजाइन में सुधार करके और भी बेहतर बनाने की कोशिश करें। टेस्ला लग गए काम पर और उन्होंने यह कर दिखाया।

थॉमस अल्वा एडिसन की कंपनी डायरेक्ट करंट यानी DC का प्रयोग करती थी। और उसी डायरेक्ट करंट से वह दुनिया में क्रांति लाना चाहते थे। लेकिन DC करंट से जुड़ी हुई कुछ समस्याएं थी जैसे कि वह बल्ब जलाने के लिए तो ठीक था । लेकिन कमर्शियल USE के लिए यानी मशीनों को चलाने के लिए पर्याप्त बिजली नहीं उत्पन्न कर पाता था। अमेरिका में थॉमस अल्वा एडिसन और उनकी एक टीम इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने में लगी थी। लेकिन उनको सफलता नहीं मिल पा रही थी। DC करंट के साथ दूसरी समस्या यह थी कि जिस क्षेत्र में इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई होती थी उस क्षेत्र में एक Mile के अंदर ही DC पावर स्टेशन का होना जरूरी था। क्योंकि DC पावर स्टेशन का वोल्टेज दूरी बढ़ने के साथ-साथ कम होता जाता था। DC करंट के साथ तीसरी समस्या यह थी की अगर लोगों को बल्ब जलाने के अलावा दूसरे उपकरणों या मशीनों को चलाना होता था जिसमें अलग-अलग वोल्टेज की जरूरत होती थी तो उसके लिए अलग से पावर लाइन बिछानी होती थी। इस कारण से इसका इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस काफी महंगा था।

Thomas Alva Edison


इस समस्या को जानते थे निकोला टेस्ला। और इस वजह से वह अल्टरनेटिंग करंट मोटर पर काम कर रहे थे। क्योंकि अल्टरनेटिंग करंट का वोल्टेज दूरी बढ़ने के साथ कम नहीं होता था। साथ ही साथ wire के जरिए हाई वोल्टेज का करंट सप्लाई किया जा सकता था और जहां पर भी जितनी हाई या low वोल्टेज की करंट की जरूरत होती थी उसको कम या ज्यादा किया जा सकता था। मतलब रेलवे से लेकर बेडरूम की लाइट तक की पावर सप्लाई AC मोटर्स के जरिए same wire से की जा सकती थी। और दूसरी तरफ अल्टरनेटिंग करंट की कीमत भी कम थी। टेस्ला AC मोटर के अपने मॉडल को दिखाने के लिए थॉमस अल्वा एडिसन से मिलना चाहते थे। अब वह साल आया जब टेस्ला ने अमेरिका मे कदम रखा। हुआ यूं कि एडिशन के मैनेजर जिनका नाम था चार्ल्स बैचलर। चार्ल्स बैचलर थॉमस अल्वा एडिसन के सबसे ज्यादा भरोसेमंद employee और अच्छे दोस्त थे। चार्ल्स बैचलर, निकोला टेस्ला की काबिलियत को अच्छी तरह से जानते थे। उन्होंने थॉमस अल्वा एडिसन को टेस्ला के लिए एक रिकमेंडेशन लेटर भी दिया। जिसमें उन्होंने लिखा था " मेरे दोस्त एडिशन, दुनिया में मैं सिर्फ दो महान लोगों को जानता हूं एक तो तुम हो और दूसरा है यह जेंटलमैन"। बैचलर के रिकमेंडेशन पर एडिशन के कंपनी ने निकोला टेस्ला को भी अमेरिका बुला लिया।

Charles W. Batchelor

टेस्ला मेहनत के साथ एडिशन की कंपनी के साथ काम करते रहे और वहां काम करते हुए एडिशन के DC पावर के इंस्टॉलेशन और जनरेटर की इंप्रूवमेंट पर काम करते थे। टेस्ला को 24 अलग-अलग तरह की मशीनों को बनाने का भी काम दिया गया। और टेस्ला उन मशीनों को बनाने में जुड़ गए। टेस्ला को मौका भी मिला एडिशन को अपने AC मोटर के मॉडल को दिखाने का। एडिसन को पहले से पता था टेस्ला के उस इंवेंशन के बारे में। उन्होंने टेस्ला से यह कहा कि उनका AC मोटर बेकार है। और इसका कोई future भी नहीं है। क्योंकि यह लोगों के लिए बहुत खतरनाक भी है। एडिशन को लगा कि अगर यह AC मोटर मार्केट में आ गया तो उनके DC करंट सिस्टम को बहुत नुकसान होगा। टेस्ला मायूस हो गए लेकिन उन्होंने लगभग 6 महीने तक एडिशन की कंपनी में काम किया। और उनके DC सिस्टम में काफी सुधार किए। और साथ ही साथ जिन 24 मशीनों को बनाने का काम उनको दिया गया था वह भी उन्होंने पूरा किया। इस काम के लिए एडिशन ने उनको $50000 देने का वादा भी किया। लेकिन जब $50000 देने की बात आई तो थॉमस अल्वा एडिसन मुकर गए और उन्होंने कहा कि मैं तो मजाक कर रहा था। क्या तुम अमेरिका के लोगों का मजाक भी नहीं समझते। इस घटना को सहन नहीं कर पाए टेस्ला और उन्होंने जनवरी 1885 मे एडिशन की कंपनी को छोड़ दिया और वापस मुड़कर कभी नहीं देखा।

अब शुरू होती है निकोला टेस्ला के जिंदगी की वह कहानी जिसमें उन्होंने चौका देने वाले अविष्कार किए। उनके और एडिशन के बीच में छिड़ी "करंट वार"। एडिशन की कंपनी छोड़ने के बाद टेस्ला ने उन सारे अविष्कारों.........

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