Moral Hindi Short Stories For Class 4 Students And Childrens


आज के इस article मे हम वर्ग 4 के लिए 3 best नैतिक कहानीयां (Moral Hindi Short Stories For Class 4 Students) उपलब्ध करा रहे हैं। ये कहानियां कक्षा चार व अन्य छात्रों के बहुत ही मददगार साबित होगी। This hindi stories for class 4 are with moral values.


3 Best Short Moral Stories For Class 4 In Hindi

Moral Hindi Short Stories For Class 4 Students And Childrens
Moral Hindi Stories For Class 4

नैतिक मूल्यों वाली यह हिंदी कहानियाँ निश्चित रूप से छात्रों को जीवन में और बेहतर प्रदर्शन करने में मदद करेंगी।

तो आईये कहानी शुरू करते हैं - 



    (1). बाज की सीख


    (Hindi Short Stories For Class 4 With Moral Values)


    एक बार एक शिकारी जंगल में शिकार करने के लिए गया। बहुत प्रयास करने के बाद उसने जाल में एक बाज पकड़ लिया।

    शिकारी जब बाज को लेकर जाने लगा तब रास्ते में बाज ने शिकारी से कहा, “तुम मुझे लेकर क्यों जा रहे हो?”

    शिकारी बोला, “ मैं तुम्हे मारकर खाने के लिए ले जा रहा हूँ।”

    बाज ने सोचा कि अब तो मेरी मृत्यु निश्चित है। वह कुछ देर यूँही शांत रहा और फिर कुछ सोचकर बोला, “देखो, मुझे जितना जीवन जीना था मैंने जी लिया और अब मेरा मरना निश्चित है, लेकिन मरने से पहले मेरी एक आखिरी इच्छा है।”

    “बताओ अपनी इच्छा?”, शिकारी ने उत्सुकता से पूछा।

    बाज ने बताना शुरू किया-

    मरने से पहले मैं तुम्हें दो सीख देना चाहता हूँ, इसे तुम ध्यान से सुनना और सदा याद रखना।

    पहली सीख तो यह कि किसी कि बातों का बिना प्रमाण, बिना सोचे-समझे विश्वास मत करना।

    और दूसरी ये कि यदि तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो या तुम्हारे हाथ से कुछ छूट जाए तो उसके लिए कभी दुखी मत होना।

    शिकारी ने बाज की बात सुनी और अपने रस्ते आगे बढ़ने लगा।

    कुछ समय बाद बाज ने शिकारी से कहा- “ शिकारी, एक बात बताओ…अगर मैं तुम्हे कुछ ऐसा दे दूँ जिससे तुम रातों-रात अमीर बन जाओ तो क्या तुम मुझे आज़ाद कर दोगे?”

    शिकारी फ़ौरन रुका और बोला, “ क्या है वो चीज, जल्दी बताओ?”

    बाज बोला, “ दरअसल, बहुत पहले मुझे राजमहल के करीब एक हीरा मिला था, जिसे उठा कर मैंने एक गुप्त स्थान पर रख दिया था। अगर आज मैं मर जाऊँगा तो वो हीरा ऐसे ही बेकार चला जाएगा, इसलिए मैंने सोचा कि अगर तुम उसके बदले मुझे छोड़ दो तो मेरी जान भी बच जायेगी और तुम्हारी गरीबी भी हमेशा के लिए मिट जायेगी।”

    यह सुनते ही शिकारी ने बिना कुछ सोचे समझे बाज को आजाद कर दिया और वो हीरा लाने को कहा।

    बाज तुरंत उड़ कर पेड़ की एक ऊँची साखा पर जा बैठा और बोला, “ कुछ देर पहले ही मैंने तुम्हे एक सीख दी थी कि किसी के भी बातों का तुरंत विश्वास मत करना लेकिन तुमने उस सीख का पालन नही किया…दरअसल, मेरे पास कोई हीरा नहीं है और अब मैं आज़ाद हूँ।

    यह सुनते ही शिकारी मायूस हो पछताने लगा…तभी बाज फिर बोला, तुम मेरी दूसरी सीख भूल गए कि अगर कुछ तुम्हारे साथ कुछ बुरा हो तो उसके लिए तुम कभी पछतावा मत करना।

    Moral : 

    Here is the moral of this Hindi story for class 4.

    दोस्तों इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि हमे किसी अनजान व्यक्ति पर आसानी से विश्वास नहीं करना चाहिए और किसी प्रकार का नुक्सान होने या असफलता मिलने पर दुखी नहीं होना चाहिए, बल्कि उस बात से सीख लेकर भविष्य में सतर्क रहना चाहिए।



     (2). बुद्धिमान साधु


    (Moral Hindi Short Stories For Class 4) 


    किसी राजमहल के द्वार पर एक साधु आया और द्वारपाल से बोला कि भीतर जाकर राजा से कहे कि उनका भाई आया है।

    द्वारपाल ने समझा कि शायद ये कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो जो संन्यास लेकर साधुओं की तरह रह रहा हो!

    सूचना मिलने पर राजा मुस्कुराया और साधु को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया।

    साधु ने पूछा – कहो अनुज, क्या हाल-चाल हैं तुम्हारे?

    “मैं ठीक हूँ आप कैसे हैं भैया?”, राजा बोला।

    साधु ने कहा- जिस महल में मैं रहता था, वह पुराना और जर्जर हो गया है। कभी भी टूटकर गिर सकता है। मेरे 32 नौकर थे वे भी एक-एक करके चले गए। पाँचों रानियाँ भी वृद्ध हो गयीं और अब उनसे कोई काम नहीं होता…

    यह सुनकर राजा ने साधु को 10 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया।

    साधु ने 10 सोने के सिक्के कम बताए।

    तब राजा ने कहा, इस बार राज्य में सूखा पड़ा है, आप इतने से ही संतोष कर लें।

    साधु बोला- मेरे साथ सात समुन्दर पार चलो वहां सोने की खदाने हैं। मेरे पैर पड़ते ही समुद्र सूख जाएगा… मेरे पैरों की शक्ति तो आप देख ही चुके हैं।

    अब राजा ने साधु को 100 सोने के सिक्के देने का आदेश दिया।

    साधु के जाने के बाद मंत्रियों ने आश्चर्य से पूछा, “ क्षमा करियेगा राजन, लकिन जहाँ तक हम जानते हैं आपका कोई बड़ा भाई नहीं है, फिर आपने इस ठग को इतना इनाम क्यों दिया?”

    राजन ने समझाया, “ देखो, भाग्य के दो पहलु होते हैं। राजा और रंक। इस नाते उसने मुझे भाई कहा।

    जर्जर महल से उसका आशय उसके बूढ़े शरीर से था… 32 नौकर उसके दांत थे और 5 वृद्ध रानियाँ, उसकी 5 इन्द्रियां हैं।

    समुद्र के बहाने उसने मुझे उलाहना दिया कि राजमहल में उसके पैर रखते ही मेरा राजकोष सूख गया…क्योंकि मैं उसे मात्र दस सिक्के दे रहा था जबकि मेरी हैसियत उसे सोने से तौल देने की है। इसीलिए उसकी बुद्धिमानी से प्रसन्न होकर मैंने उसे सौ सिक्के दिए और कल से मैं उसे अपना सलाहकार नियुक्त करूँगा।


    Moral :

    Here is the moral of this Hindi story for class 4.

    दोस्तों इस कहानी से हमें ये सीख मिलती है कि किसी व्यक्ति के बाहरी रंग रूप से उसकी बुद्धिमत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। हमें सिर्फ इसलिए कि किसी ने खराब कपडे़ पहने हैं या वो देखने में अच्छा नहीं है; उसके बारे में गलत विचार नहीं बनाने चाहियें।


    (3). मेहनत का महत्त्व 


    Moral Stories In Hindi For Class 4


    राहुल एक समझदार लड़का था, लेकिन वह पढाई के मामले में हमेशा मेहनत करने से बचता था।

    एक बार जब उसका पसंदीदा कप टूट गया तो माँ ने उसे बाज़ार से खुद जाकर एक अच्छा कप लाने को कहा। पहली बार राहुल को इस तरह का कोई काम मिला था, वह मन ही मन खुश हो रहा था कि चलो इसी बहाने उसे बाहर जाने को मिलेगा और उतनी देर कोई पढने के लिए नहीं कहेगा।

    वह पास के बाजार में पहुंचा और इधर-उधर कप खोजने लगा। वह जो भी कप उठाता उसमे कोई न कोई कमी होती… कोई कमजोर होता तो किसी की डिजाईन अच्छी नहीं होती! काफी खोजने पर भी उसे कोई अच्छा कप नहीं दिखाई दिया और वो मायूस लौटने लगा।

    तभी उसकी नज़र सामने की दूकान में रखे एक लाल रंग के कप पे जा टिकी। उसकी चमक और ख़ूबसूरती देख राहुल खुश हो गया औ झट से दुकानदार से वो कप हाथ में ले देखने लगा।

    कप वाकई में बहुत अच्छा था! उसकी मजबूती…उसकी चमक…उसकी शानदार डिजाईन…हर चीज परफेक्ट थी।

    राहुल ने वो कप खरीद लिया और घर चला गया।

    रात को भी वो कप अपने साथ ले बिस्तर पे लेट गया, और देखते-देखते उसे नींद आ गयी।

    वह गहरी नींद में सो रहा था कि तभी उसे एक आवाज़ सुनाई दी…राहुल…राहुल…

    राहुल ने देखा कि वो कप उससे बातें कर रहा है।

    कप- मैं जानता हूँ कि मैं तुम्हे बहुत पसंद हूँ। पर क्या तुम जानते हो कि मैं पहले ऐसा नहीं था?

    राहुल- नहीं, मुझे नहीं पता…तुम्ही बताओ कि पहले तुम कैसे थे।

    कप- एक समय था जब मैं मामूली लाल मिटटी हुआ करता था। फिर एक दिन मेरा मास्टर मुझे अपने साथ ले गया। उसने मुझे जमीन पर पटक दिया और मेरे ऊपर पानी डाल कर अपने हाथों से मुझे मिलाने लगा…मैं चिल्लाया कि अब बस करो…लेकिन वो कहता रहा…अभी और…अभी और…मैंने बहुत कष्ट सहे…जब वो रुका तो मुझे लगा कि बस अब जो होना था हो गया….अब मैं पहले से काफी अच्छी स्थिति में हूँ।

    लेकिन ये क्या, उसने मुझे उठाकर एक घुमते हुए चक्के पे फेंक दिया। वह चक्का इतनी तेजी से नाच रहा था कि मेरा तो सर ही चकरा गया…मैं चिल्लाता रहा…अब बस…अब बस….लेकिन मास्टर कहता…अभी और..अभी और… और वो अपने हाथ और डंडे से मुझे आकार देता रहा जब तक कि मैं एक कप के शेप में नहीं आ गया।

    खैर! सच कहूँ तो पहले तो मुझे बुरा लग रहा था, लेकिन अब मैं खुश था कि चलो इतने कष्ट सह कर ही सही अब मैं अपने जीवन में कुछ बन गया हूँ, वर्ना उस लाल मिटटी के रूप में मेरी कोई वैल्यू नहीं थी।

    लेकिन, मैं गलत था…अभी तो और कष्ट सहने बाकी थे।

    मास्टर ने मुझे उठा कर आग की भट्ठी में डाल दिया… मैंने अपने पूरे जीवन कभी इतनी गर्मी नहीं सही थी…लगा मानो मैं वहीँ जल कर भष्म हो जाऊँगा….मैं एक बार फिर चिल्लाया…नहीं…नहीं…मुझे बाहर निकालो…अब बस करो…अब बस करो….

    लेकिन मास्टर फिर यही बोला…अभी और…अभी और…और कुछ देर बाद मुझे भट्ठी से निकाल दिया गया।

    अब मैं अपने आप को देखकर हैरान था…मेरी ताकत कई गुना बढ़ गयी थी…मेरी मजबूती देखकर मास्टर भी खुश था, उन्होंने मुझे फ़ौरन रंगने के लिए भेज दिया और मैं अपने इस शानदार रूप में आ गया। सचमुच, उस दिन मुझे खुद पर इतना गर्व हो रहा था जितना पहले कभी नहीं हुआ था।

    हाँ, ये भी सच है कि उससे पहले मैंने कभी इतनी मेहनत नहीं की थी…इतने कष्ट नहीं सहे थे…लेकिन आज जब मैं अपने आप को देखता हूँ तो मुझे लगता है कि मेरा संघर्ष मेरी मेहनत बेकार नहीं गयी, आज मैं सर ऊँचा उठा कर चल सकता हूँ…आज मैं कह सकता हूँ कि मैं दुनिया के सबसे अच्छे कपों में से एक हूँ।

    राहुल सारी बातें बड़े ध्यान से सुन रहा था और जैसे ही कप ने अपनी बात पूरी की उसकी आँखें खुल गयीं।

    आज सपने में ही सही, राहुल मेहनत का महत्त्व समझ गया था। उसने मन ही मन निश्चय किया कि अब वो कभी मेहनत से जी नहीं चुराएगा और अपने टीचर्स और पेरेंट्स के कहे अनुसार मन लगा कर पढ़ेगा और कड़ी मेहनत करेगा।


    Moral: 

    Here is the moral of this Hindi story for class 4.

    दोस्तों इस कहानी से हमें कड़ी मेहनत करने की सीख मिलती है, फिर चाहे वो पढाई हो, खेल हो या कोई और चीज। 

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    आशा है की ये best hindi Short stories for class 4 आपको पसन्द आयी होगी। नीचे और भी कहानियाँ हैं जिन्हे पढ़ कर आप और भी लुत्फ़ ले सकते हैं। तो आईये इन कहानियों को भी पढ़ते हैं। 




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